विनियोग (INVESTMENT)

विनियोग(INVESTMENT)

    विनियोग(INVESTMENT): साधारण बोलचाल की भाषा में विनियोग का आशय अतिरिक्त आय कमाने के उदृदेश्य से अपनी बचत को विनियोजित  करने से लगाया जाता है। विनियोग से जहाँ एक ओर तो नियमित आय प्राप्त होती है और दूसरी ओर भविष्य की सुरक्षा के लिए धन का  संचय हो जाता है ।

    आधुनिक समय में विनियोगों को विशिष्ट अर्थ में प्रयुक्त किया जाता है  जब कोई  व्यक्ति या संस्था अपनी बचत को अंशो(SHARES), ऋणपत्रों(DEBENTURES) या सरकारी ऋणों या बाण्ड्सों(BONDS) में विनियोजित कर देता है तो इसे विनियोग कहा जाता है। इनका स्वतंत्र रूप से क्रय विक्रय किया जाता है इन पर समय-समय पर ब्याज(INTEREST) अथवा लाभांश(DIVIDEND) के रूप में आय प्राप्त होती है। लाभांश (DIVIDEND) – PARTS OF PROFIT

प्रतिभूतियाँ (SECURITIES)

 जब कोई  व्यक्ति या संस्था अपनी बचत को अंशो (SHARES),ऋणपत्रों(DEBENTURES) या सरकारी ऋणों या बाॅण्ड्सों(BONDS) में विनियोजित कर देता है तो इसके लिखित प्रमाण स्वरूप जो प्रपत्र मिलते हैं उन्हैं प्रतिभूतियाँ

(SECURITIES) कहा जाता है। इन पर इनके निर्गमन(ISSUE) और शोधन(REDEMPTION) और ब्याज (INTEREST) एवं लाभांश (DIVIDEND) के भुगतान की शर्ते लिखी  होती है।

विनियोग(INVESTMENT): प्रतिभूतियों(SECURITIES) में जो धन विनियोजित किया जाता है , उसे विनियोग(INVESTMENT) कहा जाता है।

    प्रतिभूतियों  के प्रकार (TYPES OF SECURITIES)

    1.सरकारी प्रतिभूतियाँ (GOVERNMENT SECURITIES)

वे प्रतिभूतियाँ जो केन्द्र या राज्यसरकार द्वारा जारी की जाती हैं, सरकारी प्रतिभूतियाँ कहलाती हैं। धन की पूर्ण सुरक्षा रहती है। ब्याज की दर(RATE OF INTEREST) कम होती है।

    2.अर्द्धसरकारी प्रतिभूतियाँ (SEMI-GOVERNMENT SECURITIES)

वे प्रतिभूतियाँ जोे अर्द्ध-सरकारी संस्थाओं द्वारा जारी की जाती हैं, अर्द्ध-प्रतिभूतियाँ कहलाती हैं। धन की सुरक्षा रहती है और जोखिम (RISK) कम रहता है, लेकिन ब्याज की दर अधिक होती है।

    3.गैरसरकारी प्रतिभूतियाँ  (NON-GOVERNMENT SECURITIES) –

वे प्रतिभूतियाँ जो औघोगिक संस्थाओं और कम्पनियों द्वारा जारी की जाती है, गैर-सरकारी प्रतिभूतियाँ कहलाती हैं। जोखिम(RISK) अघिक होता है लेकिन ब्याज की दर बहुत अधिक होती है। जैसे TATA Motors Limited, Reliance Industries Limited, Tata Consultancy Services Ltd द्वारा जारी की गयी प्रतिभूतियाँ आदि।

    विनियोग से लाभ(BENEFITS FROM INVESTMENT)

    विनियोगकर्ता को लाभ (BENEFITS TO INVESTOR)

  1. भविष्य की आवश्यकता के लिए धन संचय हो जाता है।
  2. ब्याज अथवा लाभांश के रूप में नियमित आय प्राप्त होती है।
  3. आयकर में छूट प्राप्त होती है। बचत की आदत होती है।
  4. धन के चोरी होने का भय नहीं रहता है।
  5. समाज में प्रतिष्ठा बढ़ती है और जीवन स्तर में सुधार होता हेै।

    विनियोग प्राप्तकर्ता को लाभ (BENEFIT TO THE INVESTMENT RECIPENT))

  1. आवश्यकता के लिए धन की प्राप्ति हो जाती है।
  2. स्वतंत्रता पूर्वक धन का उपयोग किया जा सकता है।
  3. व्यापार एवं उद्योग के विकास में सहायक होते हैं।

    सरकार को लाभ (BENEFITS TO THE GOVERNMENT)

  1. देश का औद्योगिक विकास होता है।
  2. रोजगार के साधनों में वृद्धि होती है।
  3. राष्ट्रीय आय ( NATIONAL INCOME) और प्रति व्यक्ति आय (PER CAPITA INCOME) में वृद्धि होती है।
  4. देश का आर्थिक विकास होता है।
  5. देश में पूँजी निर्माण(CAPITAL FORMATION) होता है।

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आय की दृष्टि से प्रतिभूतियों  के प्रकार (TYPES OF SECURITIES IN TERMS OF INCOME)-   

1.ब्याज वाली प्रतिभूतियाँ (INTEREST BEARING SECURITIES)

2.लाभांश वाली प्रतिभूतियाँ (DIVIDEND BEARING SECURITIES)

ब्याज वाली प्रतिभूतियाँ (INTEREST BEARING SECURITIES)-ब्याज वाली प्रतिभूतियाँ वे प्रतिभूतियाँ होती हैं जिन पर ब्याज के रूप में आय प्राप्त होती है। जैसे- ऋणपत्र बाॅण्ड्स आदि। ब्याज वाली प्रतिभूतियों पर सामान्यतया ब्याज का भुगतान छमाही आधार पर वर्ष में दो बार किन्हीं निश्चित तिथियों पर किया जाता है। छः माह का ब्याज उसी व्यक्ति को प्राप्त होता है जिसके पास ब्याज की तिथि को विनियोग होते हैं । कभी-कभी विनियोगों पर ब्याज वार्षिक आधार पर भी प्राप्त होता है।  विनियोगों पर ब्याज की गणना हमेशा अंकित मूल्य (FACE VALUE) पर की जाती है।विनियोगों पर दलाली आदि की गणना हमेशा अंकित मूल्य पर की जाती है।

लाभांश वाली प्रतिभूतियाँ (DIVIDEND BEARING SECURITIES)-लाभांश वाली प्रतिभूतियाँ वे प्रतिभूतियाँ होती हैं जिन पर लाभांश के रूप में आय प्राप्त होती है। जैस समता अंश, पूर्वाधिकार अंश आदि।

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